भ्रष्टाचार कभी पूर्ण ख़त्म नहीं किया जा सकता (जब घूस देने वाला भी खुश है और लेने वाला भी खुश है और इस से किसी तीसरे को भी कोई परेशानी ना है) हम खाली उस भ्रष्टाचार को ख़त्म कर सकते है जिस से किसी को परेशानी हो (घूस देने या लेने वाले को या इन दोनों के कारण किसी तीसरे को )..
अगर आप:-
सरकारी अधिकारी है और रिशवत आपकी मज़बूरी है:-
तो हमे ईमानदार अधिकारी नहीं चाहिए क्योकि हम नहीं चाहते की आप दिवार पे टंगी तस्वीर बन जाए मतलब साफ़ है मान लीजिये एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ जिलाधिकारी एक नए शहर मे आया | तुरंत वहां के दलाल और माफिया उसके इर्द-गिर्द मंडराते नज़र आ जाते है | अब यदि उस शहर का नामी-गिरामी शख्स जो पेशे से बिल्डर है रियल स्टेट का (वास्तव मे भू-माफिया है) आये और बोले -" सर ये पेसे के तौर पर ये 30 लाख सूटकेस मे रखा है रख लीजिये और इस फाइल मे हस्ताक्षर कर दीजिए |अब आप बताइए ऐसे स्थिति मे वह सरकारी कर्मचारी क्या करे ! उसके पास केवल दो विकल्प बचते है|पहला वह अवैध और गैरकानूनी ढंग से बनायीं जा रही प्रोजेक्ट को पास कर दे और आराम से पैसा रख ले| और दूसरा वह अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए प्रोजेक्ट को पास करने से इंकार कर दे |इसका परिणाम उसको पता है-अगले दिन वह गोली का शिकार हो जायेगा और दीवार पे टंगी तस्वीर बन जायेगा |इस विकल्प मे उसे पैसा (घूस) भी नहीं मिलता और गैरकानूनी तरीके से मृत्यु भी प्राप्त हो जाती है |
दूसरा उदहारण :- यदि किसी तंत्र मे निचला अधिकारी अपने से ऊँचे पदाधिकारी को चढ़ावा नहीं चढ़ाता क्योंकि वह ईमानदार है तो उसके साथ क्या होता है; पता है उसका कही दूर जंगल-पहाड़ मे तबादला कर दिया जाता है | यहाँ ऊपर के अधिकारी की मानसिकता साफ़ झलकती है -"वह सोचता है की निचला अधिकारी सारा का सारा माल अकेले हड़प लेना चाहता है "| हालात से मजबूर होके वह इमानदार कर्मचारी भी दबाव में आकर घुस लेना आरम्भ कर देता है | ये घटनाएँ पुलिस ,बैंक और विकास प्राधिकरण मे आसानी से देखने को मिल जाएँगी |
ताकत से ही ताकत को मारा जा सकता है बस फर्क तो इतना होगा बुराई की ताकत को मारने वाली एक अच्छाई की ताकत होगी बिलकुल उसी तरह यहाँ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार को ख़त्म करेगा ! आपको ईमानदार नहीं बनना; लेकिन बेईमानो मे से कुछ ईमानदार बनना है | यदि आपको सच मे ईमानदारी से कार्य करना है तो एक काम करना होगा |अब तक दो विकल्प थे --एक तरफ पैसा,जिंदगी और आराम है और दूसरी तरफ ईमानदारी के साथ मौत | मै तीसरा विकल्प बताता हूँ! इस विकल्प मे पैसा भी मिल जायेगा ,उस पैसे से माफिया को साफ़ करने का रास्ता भी मिल जायेगा ( हमारे साथ मिलके उन्ही के पैसे से उन्हें ख़त्म करदो ) और कुछ गरीबों मे बांटकर धर्म और ईमानदारी का कार्य भी हो जायेगा |
इस कार्य के करने के तीन वजह :-
आप आम जनता है:-
(आम जनता को दो भागो में बांटा जाता है 90% और 10%)
जादातर सरकारी अधिकारी रिशवत नहीं मागते 90% जनता अपनी इच्छा से रिशवत देना पसंद करते है क्योंकि :-
जनता से अपील :- आप 90% जनता रिशवत देनी छोड़ के अपना काम व्यवस्थित तरीके से करवाने कि आदत डाल लो या भ्रष्टाचार के लिए व्यवस्था पर प्रत्यारोपण करना बंद करदो! आप लोग तो शोर मचा के किनारे हो जाते हो कि "भ्रष्टचार ने जीना दुष्वार कर दिया जन्म परमाण पत्र से लेकर मृत्यु परमाण पत्र तक के लिए रिश्वत देनी पड़ती है" आप लोगो के कारण इमानदार अधिकारियो का इमानदारी से काम करना और सच्चे लोगो का बिना रिशवत दिए काम करवाना मुश्किल हो जाता है!
अगर आप 10% जनता में से है तो:-
कोई हम से कब पैसे मांगता है वो भी उस काम को करने के लिए जिसे करना उसकी जिम्मेवारी है???
जब उसको लगता है की हम अज्ञान, अकेले आम आदमी है और हम अपनी आवाज नहीं उठा सकते, अगर वो अपना काम नहीं करेगा तो हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएँगे और हमे उसको मजबूर होके पैसे देने पड़ेगे.....
आपका जल्दी से जल्दी काम हो जाएगा साथ ही आप खुद उस भ्रष्ट को सजा भी दिलवा सकोगे! क्योकि अब आप अकेले, अज्ञान, आम आदमी ना होके एक जागरूक शक्तिशाली और विशाल परिवार के सदस्य होगे!
आप हमे इस तरह सहियोग दे सकते है!
सरकारी अधिकारी है और रिशवत आपकी मज़बूरी है:-
तो हमे ईमानदार अधिकारी नहीं चाहिए क्योकि हम नहीं चाहते की आप दिवार पे टंगी तस्वीर बन जाए मतलब साफ़ है मान लीजिये एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ जिलाधिकारी एक नए शहर मे आया | तुरंत वहां के दलाल और माफिया उसके इर्द-गिर्द मंडराते नज़र आ जाते है | अब यदि उस शहर का नामी-गिरामी शख्स जो पेशे से बिल्डर है रियल स्टेट का (वास्तव मे भू-माफिया है) आये और बोले -" सर ये पेसे के तौर पर ये 30 लाख सूटकेस मे रखा है रख लीजिये और इस फाइल मे हस्ताक्षर कर दीजिए |अब आप बताइए ऐसे स्थिति मे वह सरकारी कर्मचारी क्या करे ! उसके पास केवल दो विकल्प बचते है|पहला वह अवैध और गैरकानूनी ढंग से बनायीं जा रही प्रोजेक्ट को पास कर दे और आराम से पैसा रख ले| और दूसरा वह अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए प्रोजेक्ट को पास करने से इंकार कर दे |इसका परिणाम उसको पता है-अगले दिन वह गोली का शिकार हो जायेगा और दीवार पे टंगी तस्वीर बन जायेगा |इस विकल्प मे उसे पैसा (घूस) भी नहीं मिलता और गैरकानूनी तरीके से मृत्यु भी प्राप्त हो जाती है |
दूसरा उदहारण :- यदि किसी तंत्र मे निचला अधिकारी अपने से ऊँचे पदाधिकारी को चढ़ावा नहीं चढ़ाता क्योंकि वह ईमानदार है तो उसके साथ क्या होता है; पता है उसका कही दूर जंगल-पहाड़ मे तबादला कर दिया जाता है | यहाँ ऊपर के अधिकारी की मानसिकता साफ़ झलकती है -"वह सोचता है की निचला अधिकारी सारा का सारा माल अकेले हड़प लेना चाहता है "| हालात से मजबूर होके वह इमानदार कर्मचारी भी दबाव में आकर घुस लेना आरम्भ कर देता है | ये घटनाएँ पुलिस ,बैंक और विकास प्राधिकरण मे आसानी से देखने को मिल जाएँगी |
ताकत से ही ताकत को मारा जा सकता है बस फर्क तो इतना होगा बुराई की ताकत को मारने वाली एक अच्छाई की ताकत होगी बिलकुल उसी तरह यहाँ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार को ख़त्म करेगा ! आपको ईमानदार नहीं बनना; लेकिन बेईमानो मे से कुछ ईमानदार बनना है | यदि आपको सच मे ईमानदारी से कार्य करना है तो एक काम करना होगा |अब तक दो विकल्प थे --एक तरफ पैसा,जिंदगी और आराम है और दूसरी तरफ ईमानदारी के साथ मौत | मै तीसरा विकल्प बताता हूँ! इस विकल्प मे पैसा भी मिल जायेगा ,उस पैसे से माफिया को साफ़ करने का रास्ता भी मिल जायेगा ( हमारे साथ मिलके उन्ही के पैसे से उन्हें ख़त्म करदो ) और कुछ गरीबों मे बांटकर धर्म और ईमानदारी का कार्य भी हो जायेगा |
इस कार्य के करने के तीन वजह :-
- "आत्मेन रक्ष्यते परमोधर्मः || " तो पैसा लेकर अपनी जिंदगी बचाओ, अपनी जिंदगी सही सलामत रही तभी तो कोई भी ईमानदारी का काम करने लायक रह पाएंगे |
- "शाठ्यम सदा दुर्जनः||" उस माफिया को ख़त्म करके एक कर्तव्य भी पूरा करो |
- पैसा गरीबों मे बांटकर एक नेकी और धर्म का कार्य भी कर दो |
आप आम जनता है:-
(आम जनता को दो भागो में बांटा जाता है 90% और 10%)
जादातर सरकारी अधिकारी रिशवत नहीं मागते 90% जनता अपनी इच्छा से रिशवत देना पसंद करते है क्योंकि :-
- हम जल्दबाजी में होते है और जल्दी से जल्दी काम करवाना चाहते है
- हमारे पास कागज पत्री पूरी नहीं होती जो उस काम के लिए जरूरी होते है जो हम करवाना चाहते है!
- हम लम्बी लाइनों में नहीं लगना चाहते!
- हम किसी कार्य के लिए अयोग्य होते है और उस कार्य को करने कि इच्छा रखते है!
जनता से अपील :- आप 90% जनता रिशवत देनी छोड़ के अपना काम व्यवस्थित तरीके से करवाने कि आदत डाल लो या भ्रष्टाचार के लिए व्यवस्था पर प्रत्यारोपण करना बंद करदो! आप लोग तो शोर मचा के किनारे हो जाते हो कि "भ्रष्टचार ने जीना दुष्वार कर दिया जन्म परमाण पत्र से लेकर मृत्यु परमाण पत्र तक के लिए रिश्वत देनी पड़ती है" आप लोगो के कारण इमानदार अधिकारियो का इमानदारी से काम करना और सच्चे लोगो का बिना रिशवत दिए काम करवाना मुश्किल हो जाता है!
अगर आप 10% जनता में से है तो:-
कोई हम से कब पैसे मांगता है वो भी उस काम को करने के लिए जिसे करना उसकी जिम्मेवारी है???
जब उसको लगता है की हम अज्ञान, अकेले आम आदमी है और हम अपनी आवाज नहीं उठा सकते, अगर वो अपना काम नहीं करेगा तो हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएँगे और हमे उसको मजबूर होके पैसे देने पड़ेगे.....
- सबसे पहले उन लोगो को पैसे देना बंद करो!
- जब पैसे मांगे उसी टाइम शोर माचो सबके सामने चिला-२ के कहो ये मेरे से पैसे मांग रहा है!
- RTI लगाओ, स्ट्रिंग ऑपरेशन करो या उस भ्रष्ट कि शिकायत करो! कहा? और कैसे? वो हम बताएँगे!(जानने के लिए यहाँ click करे)
आपका जल्दी से जल्दी काम हो जाएगा साथ ही आप खुद उस भ्रष्ट को सजा भी दिलवा सकोगे! क्योकि अब आप अकेले, अज्ञान, आम आदमी ना होके एक जागरूक शक्तिशाली और विशाल परिवार के सदस्य होगे!
(IPY की अपराध और भ्रष्टाचार के विरोध एक आवाज)
"अब हम सब साथ-साथ चलेंगे भारत का विकास करेंगे"
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